मशरूम क्या होता है? मशरूम की खेती कैसे करे? What is Mushroom in Hindi? How to grow Mushroom in Hindi?

दोस्तों, आपने कभी न कभी मशरूम (Mushrooms) के बारे में जरूर सुना होगा, और कभी न कभी खाया भी जरूर होगा। अगर नहीं तो एक बार जरूर खाकर देखे। मशरूम में कई तरह के विटामिन और मिनरल्स भी पाए जाते है। मशरूम एक तरह का फंगस है, जोकि खाया जाता है। लोग इसे इसलिए भी खाना पसंद करते है क्योंकि यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ बहुत ही सेहतमंद भी है।

आज हम जानेंगे मशरूम की खेती जिसे हिंदी में कुकुरमुत्ता के नाम से भी जाना जाता है, के बारे में सारी जानकारी। मशरूम क्या है, मशरूम की खेती कैसे की जाए, मशरूम की खेती में समय कितना लगता है, मशरूम्स की खेती में लागत और मुनाफा कितना आता है? तो आज के लेख में हमसे जुड़े रहे और जाने मशरूम या फिर कुकुरमुत्ता की खेती से जुड़ी हुई सभी जानकारियां विस्तार से वो भी हिंदी में, इसलिए लेख को अंत तक जरूर पढ़े।

मशरूम (कुकुरमुत्ता) क्या है? – What is Mushroom in Hindi?

मशरूम
मशरूम

मशरूम एक तरह फंगस है, जो सतह से ऊपर, नमी वाली जगह पर उगाया जाता है। मशरूम को एक तरह से पौधे का फल कह सकते है, जिसके बीज पूरी तरह से सूक्षदर्शी होते है, जिन्हे सिर्फ सूक्ष्मदर्शी दूरबीन से देख सकते है, जोकि मशरूम की कैप के नीचे पाए जाते है। ये बीज हवा, पानी, मवेशी आदि के माध्यम से कई जगहों पर वितरित हो जाते है। यदि इन्हे बढ़ने की लिए अनुकूल जगह मिल जाती है जैसे की नम लकड़ी, मिट्टी तो यह बहुत ही जल्दी बढ़ जाते है।

मशरूम्स सूरज की रोशनी में नहीं उगते, उन्हे अंधेरे में उगाया जाता है। मशरूम्स में विटामिन बी (Vitamin B), राइबोफ्लेविन (Riboflavin), नियासिन (Niacin) और पैंटोथैनिक एसिड (Pantothenic Acid), फाइबर (Fiber), प्रोटीन (Protein), आयरन (Iron), पोटेशियम (Potassium), फोलेट (Folate), थियामिन (Thiamin), सेलेनियम (Selenium), कॉपर (Copper), जिंक (Zinc) आदि बहुत ही प्रचुर मात्रा में पाए जाते है।

कौन से मशरूम खाने योग्य होते है? – Which Mushrooms can be consumed in Hindi?

संपूर्ण विश्व में बहुत ही प्रजाति के मशरूम पाए जाते है। इनमे से ज्यादातर खाने योग्य नहीं होते है, केवल कुछ ही ऐसी प्रजाति के मशरूम है जिन्हे खाया जा सकता है। यदि कोई भी उन मशरूम्स को खा ले जो खाने योग्य नही है, तब उस इंसान को मिचली आना, चक्कर आना, सरदर्द, तेज़ बुखार, पेट खराब आदि बीमारियां हो सकती है। कई मशरूम्स तो इंसानों के लिए बेहद ही घातक होते है, यदि इनको कोई खा ले तो उसकी मौत भी हो सकती है।

इंसानों के खाने योग्य मशरूम्स में बटन मशरूम (Button Mushroom), ओयस्टर (oyster), पैडी स्ट्रा (Paddy Straw), पोर्सिनी (Porcini), चैंटरेले (Chanterelle), शीताके (Shiitake), मैताके (Maitake), रेईशी (Reishi) आदि है। पूरे भारत सबसे ज्यादा खाया जाने वाले मशरूम्स बटन मशरूम, ओयस्टर मशरूम तथा पैडी स्ट्रा मशरूम है, यह भारत में लगभग हर जगह मिल जाता है। भारत में सबसे ज्यादा उगाये जाने मशरूम भी यही है। भारत में सबसे ज्यादा मशरूम उत्तर प्रदेश में उगाया जाता है।

पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा महंगा मशरूम यार्त्सा गुंबू (Yartsa Gumbu) है। इसको कैटरपिलर फंगस (Caterpillar Fungus) के नाम से भी जाना जाता है। इसकी कीमत लगभग ₹15,00,000 प्रति किलोग्राम है। यह हिमालय पर्वत की चोटियों पर लगभग 4000 – 5000 मीटर की ऊंचाई पर मिलता है।

मशरूम्स की खेती के लिए आवश्यक चीजे। – Necessary items for cultivation of Mushrooms in Hindi.

  1. अच्छी गुणवत्ता वाली खाद।
  2. माइसेलियम (Mycelium) – मशरूम्स के बीज। माइसेलियम आप अपने आसपास के किसी कृषि केंद्र या बीज की दुकान से ले सकते है।
  3. खाद भरने के लिए नर्म लकड़ी से बनी ट्रे, लंबाई, ऊंचाई तथा चौड़ाई – आवश्यकता अनुसार, पर ऊंचाई 15-18 सेंटीमीटर जरूर हो।
  4. नमी और अंधेरे वाली साफ सुथरी जगह।

मशरूम्स की खेती कैसे करे? – How to cultivate Mushrooms in Hindi?

मशरूम्स की खेती के लिए आपको सबसे पहले जरूरत होंगी बढ़िया nutrients से भरपूर खाद की। मशरूम्स को भले ही अंधेरे में उगाया जाता है, परंतु उसकी खाद को बाहर खुले इलाके में बनाया जाना बहुत ही महत्वपूर्ण है। बटन मशरूम्स की खेती के लिए खाद को साफ-सुथरे, ऊंचाई पर कंक्रीट से बने हुए तल पर बनाना बहुत ही जरूरी है।

यह तल इतनी ऊंचाई पर होना चाहिए जिससे की बचा हुवा पानी कही पर न रुके और आसानी से निकल जाए। यह खाद भले ही बाहर बनाई जाती है, पर इसको बारिश के पानी से बचाना बहुत ही जरूरी है। यह खाद 100*50*15 सेंटीमीटर की ट्रे पर बनाई जाती है। यह खाद दो तरीकों से बनाई जाती है, प्रकृतिक तथा कृत्रिम।

प्राकृतिक तरीके में गेहूं का भूसा 300 किलो (Wheat Straw), गेंहू का चोकर 15 किलो (Wheat Bran), घोड़े का गोबर 10 किलो (Horse Dung), पोल्ट्री खाद 09 किलो (Poultry Manure), जिप्सम 20 किलो (Gypsum), आदि का प्रयोग किया जाता है। इस तरीके सबसे ध्यान देने वाली बात यह होती है की घोड़े का गोबर किसी और जानवर के गोबर के साथ मिश्रित न हो।

यह गोबर ताजा होने के साथ में इसमें बारिश का पानी न हो। इन सभी को अच्छे से आपस में मिलाने के बाद जिप्सम को छोड़कर, एक ढेर के रूप में इकट्ठा कर लेंगे। इसे अच्छे से तिरपाल से ढककर रखना जरूरी है। पांच दिन तक इस ढेर को ऐसे ही रहने दे। अब इसमें हर तीन दिन में अच्छे से पानी का छिड़काव करे। 13वे दिन इस ढेर में जिप्सम मिलाए।

25वे दिन इसमें 0.1% मैलाथियान (Malathion) मिलाए। कुछ समय बाद ताप बढ़ने के कारण, इसमें किण्वन (fermentation) होगा जिसके कारण इसमें से अमोनिया की बदबू आने लगेगी। 28वे दिन आपकी खाद बनकर तैयार हो जायेगी।

कृत्रिम तरीके में यूरिया 4 किलो (Urea), गेंहू का भूसा 300 किलो (Wheat Straw), गेंहू का चोकर 15 किलो (Wheat Bran), जिप्सम 20 किलो (Gypsum), कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट 09 किलो (Calcium Ammonium Nitrate), सुपर फोस्फेट 03 किलो (Super Phosphate), पोटेशियम क्लोराइड 03 किलो (Potassium Chloride) का प्रयोग होता है। भूसा को 08-20 सेंटीमीटर के टुकड़ों के काटकर, पतली सी परत, तल में फैला दे।

इसके बाद भूसे को हल्का गीला करे और यूरिया, कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट को गीले भूसे में अच्छे से मिला कर एक ढेर बना कर रख दे। इसके बाद इसे अच्छे से तिरपाल से ढककर रखना जरूरी है। पांच दिन तक इसे ऐसे ही छोड़ दे। आगे जैसे प्राकृतिक तरीके में बताया गया है, वैसे ही करे। अब यह खाद उन नर्म लकड़ी की ट्रे में बराबर से भर दे, इनमे माइसेलियम डाले और ट्रे को नमी और अंधेरे वाले कमरे में बराबर से रख दे।

इसके बाद ट्रे को कागज से ढक दे और हल्का पानी का छिड़काव करे, जिससे नमी और ताप बना रहा। सबसे ऊपर की ट्रे और छत के बीच में कम से कम 1 मीटर की दूरी अवश्य रखे। अब इन ट्रे पर पतली से मिट्टी की परत डालनी होगी। इस मिट्टी को बनाने के लिए आपको सूखे हुए गोबर को एकदम महीन पीसकर, उपजाऊ मिट्टी में मिलाना होगा।

जिससे की तैयार हुई मिट्टी में एक भी कंकड़ न हो। इस मिट्टी का पीएच 7.6-7.8 रखे। अब इस मिट्टी में फोरमालीन (Formalin) का घोल डाले, जिससे मिट्टी के सारे खतरनाक जीवाणु, रोगारु खत्म हो जाए। फिर इस मिट्टी को अगले तीन दिन 27° सेल्सियस पर रखे, उसके बाद तापमान 18° सेल्सियस कर दे।

मशरूम्स की खेती में कितना समय लगता है? – How much time is required to cultivate Mushrooms in Hindi?

ऊपर बताए गए सभी स्टेप्स को सही से करने के बाद, अब 15-20 दिन बाद आपको ट्रे पर हल्के हल्के सफेद धब्बे दिखाई देंगे। यह छोटे-छोटे धब्बे अगले कुछ दिनों में मशरूम्स बनेंगे। एक हफ्ते बाद ये धब्बे दूर से ही पहचान में आने लगेंगे। लगभग 50-60 दिन में जब यह मशरूम्स 05-06 सेंटीमीटर के हो जाए तब इन्हे तोड़ा जा सकता है।

मशरूम्स को तोड़ने के लिए इनको कैप से होते तने को हल्के हाथ से पकड़े, मिट्टी की तरफ हल्का दबाकर गोल घुमा दे, और मशरूम आपके हाथों में आसानी से आ जायेगा। अब इन्हे पैक करके आप बाजार में आसानी से बेच सकते है। मशरूम को तीन-चार दिन से ज्यादा फ्रिज में नहीं रखना चाहिए। मशरूम्स को तोड़ने के बाद उसे हल्के गीले तौलिए से ढककर रखे।

मशरूम्स की खेती में लागत और मुनाफा कितना आता है? – What is the cost and profit of cultivation of Mushrooms in Hindi?

मशरूम्स की खेती के लागत और मुनाफा कमरे की आकार, और कितना उत्पादन किया जा रहा उस पर निर्भर करता है।

कमरे का आकार30*17*09 फीट₹ 25,000
स्प्रे पंप01₹ 1,500
थर्मो हाइग्रोमीटर01₹ 500
माइसेलियम, खाद और मिट्टी 10 टन @₹2000/टन₹ 20,000
कीटनाशक ₹ 2,000
बिजली ₹ 4,000
तिरपाल ₹ 2,000
अन्य खर्चे₹ 5,000
कुल लागत₹ 60,000
उत्पादन1800 किलो
बिक्री @₹100/किलो₹ 1,80,000
मुनाफा₹ 1,20,000

ऊपर लिखी गई जानकारी केवल चित्रण उद्देश्य हेतु।

मशरूम्स के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल? – Frequently asked questions about Mushrooms?

मशरूम क्या है?

फंगस।

भारत में कौन से मशरूम सबसे ज्यादा उगाए जाते है?

बटन मशरूम, ओयस्टर मशरूम तथा पैडी स्ट्रा मशरूम।

भारत में सबसे ज्यादा मशरूम कहा उगाया जाता है?

उत्तर प्रदेश।

दुनिया का सबसे महंगा मशरूम कौन सा है?

यार्त्सा गुंबू।

यार्त्सा गुंबू की कीमत क्या है?

₹15,00,000 प्रति किलो।

निष्कर्ष – Conclusion

मशरूम न ही सब्जी न ही फल, यह एक फंगस है। फिर भी हम सभी इसे खाना पसंद करते क्योंकि यह स्वास्थ्य के लिए बहुत ही अच्छा है। इसमें कई तरह के विटामिन, मिनरल, फाइबर, प्रोटीन, कैल्शियम, पोटेशियम आदि पाए जाते है जोकि हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभदायक है। मशरूम की दुनिया में कई प्रजाति लेकिन उनमें से सिर्फ कुछ ही ऐसी है जिनको इंसानों के खाने के लिए अच्छा बताया गया है, बाकी सभी इंसानों के लिए नुकसान दायक है।

आशा है आपको मशरूम्स की खेती से जुड़ी हुई सभी जानकारी (information about cultivation of Mushrooms in Hindi) मिल गई होगी। यदि अभी भी आपके मन में मशरूम्स की खेती से जुड़ी जानकारी के बारे में कोई संदेह हो तो कमेंट में अवश्य पूछे। यदि आपको यह लेख पसंद आया हो तो अपने मित्रो के साथ जरूर शेयर करे जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगो को मशरूम और उसकी खेती से जुड़ी हुई सारी जानकारी के बारे में पता चले।

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